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Wednesday, 17 August 2011

श्री राम स्तुति



श्री राम स्तुति


श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं |
नवकंज लोचन, कंजमुख, कर कंज, पद कंजारुणं ||
कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरम |
पट पीत मानहु तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ||
भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश -निकन्दनं|
रघुनंद आनंदकंद कोशलचन्द्र दशरथ-नंदनम ||
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभुषणं|
आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम-जित-खरदूषणं||
इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि-मन-रंजनं |
मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल-गंजनं ||
मनु जाहि राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो |
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ||
एहि भांति गौरि असीस सुनि सिय सहित हिंय हरषीं अली |
तुलसी भावानिहि  पूजि पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली ||
सो० -जानि  गौरि  अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि 
        मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे