Wednesday, 17 August 2011

श्रीरुद्राष्टकम स्तोत्र







श्रीरुद्राष्टकम स्तोत्र


नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं 

विभुं व्यापकं ब्रम्ह वेदस्वरूपं |

निजं निर्गुणं निर्वीकल्पं निरीहं ,

चिदाकाशमाकाशवासं भजेहं||१|| 


निराकारमोंकारमूलं तुरीयं,

गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं|

करालं महाकाल कालं कृपालं 

गुनागार संसारपारं नतोsहं||२||


तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं

मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरं|

स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा

लसद्भाबालेंदु कंठे भुजंगा||३||


चलत्कुंडलं भू सुनेत्रं विशालं 

प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं|

मृगाधीशचर्माम्बर्म मुंडमालं

प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि||४||


प्रचंडं प्रकृष्टम प्रगल्भं परेशम

अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं|

त्रय: शूल निर्मूलनं शूलापाणिं

भजेsहं भवानीपतिं भावगम्यं||५||


 कालातीत कल्याण कल्पान्तकारी

सदा सच्चिदानन्द दाता पुरारी|

चिदानन्द संदोह मोहापहारी

प्रसीद प्रसीद प्रभु मन्मथारी||६||


न यावद उमानाथ पादारविन्दं

भजंतीह लोके परे वा नराणां|

न वातात्सुखं शान्ति संतापनाशं

प्रसीद प्रभु सर्वभूताधिवासं||७||


न जानामि योगं जपं नैव पूजां

नतोsहं सदा सर्वदा शंभू ऐतुभ्यं|

ज़रा जन्म दुखौध्य तातप्यमानं

प्रभु पाहि आपन्न मामीश शंभू||८||


श्लोक 
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये|
ये पठन्ति नरा: भक्त्या तेषां शम्भु: प्रसीदति||९||
ॐ नमः शिवाय

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