Tuesday, 16 August 2011

आरती श्री शिवजी की

आरती श्री शिवजी की

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
तीनों रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
चन्दन मृगमद सोहे भोले शुभकारी ॥ ॐ जय
श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
सनकादिक ब्रम्हादिक प्रेतादिक संगे ॥ ॐ जय
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधर्ता ।

जगकर्ता संहर्ता जग पालनकर्ता ॥ ॐ जय
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर के मध्ये तीनों ही एका ॥ ॐ जय
 त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी मन वांछित फल पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा ।

No comments:

Post a Comment