Tuesday, 16 August 2011

श्री काली मां की आरती


अंबे तू है जगदंबे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाएं भारती,
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ।।
तेरे भक्त जनों पे माता, भीर पड़ी है भारी ।
दानव दल पर टूट पड़ो मां, करके सिंह सवारी ॥
सौ सौ सिंहो से है बलशाली, है दस भुजाओं वाली ।
दुखियों के दुख को निवारती ।।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती
मां बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता ।
पूत कपूत सुने हैं पर ना,माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली ।
दुखियों के दुखड़े निवारती ।। ओ मैया ……
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना ।
हम तो मांगे मां तेरे मन में एक छोटा सा कोना ॥
सब की बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली ।
सतियों के सत को संवारती ।।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती

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